थोड़ा बदलने की तैयारी
सिहरती, सहमति कुछ सांसो में, आँखो से बहते मोतियों में, एक अनकही कहानी के पन्ने पिरोती, मौन सी पड़ी ज़िंदगी की किताब में… कभी हमारी मनमानी, कभी कुदरत की कारिस्तानी, अब कुछ भी कह लो…
सिहरती, सहमति कुछ सांसो में, आँखो से बहते मोतियों में, एक अनकही कहानी के पन्ने पिरोती, मौन सी पड़ी ज़िंदगी की किताब में… कभी हमारी मनमानी, कभी कुदरत की कारिस्तानी, अब कुछ भी कह लो…
अपनो की दुनिया में, अंजान से रास्तों पे.. मंज़िल की तरफ बढ़ता मैं… अनचाही परिस्थियों से, लड़ता, उलझता.. सवालों के घेरे में, कटघरे में खड़ा मैं… समय से पहले… अपने जीवन की परिभाषा को समझता…..
एक भीषण आपदा के चलते, जब जीवन का प्रवाह रुक सा गया, हर दिन सड़कों पर दौड़ने का सिलसिला, अब कुछ थम सा गया, राहत हुई कुछ रोज की अनचाही परेशानियों से, या शायद, जीवन…