शून्य से शिखर
तन्हा से रास्तों पर,भटकते से कदमों को थामकर,रेत पर चमकती पानी की एक बूंद सा,मैंने देखा एक धुंधला सा सपना,उलझते से ख़यालों सा,सुलझते से सवालों का,एक अनकहा सा कारवाँ,जो थामे रहता था मुझे हर लम्हा,मैंने…
तन्हा से रास्तों पर,भटकते से कदमों को थामकर,रेत पर चमकती पानी की एक बूंद सा,मैंने देखा एक धुंधला सा सपना,उलझते से ख़यालों सा,सुलझते से सवालों का,एक अनकहा सा कारवाँ,जो थामे रहता था मुझे हर लम्हा,मैंने…
वो कहते हैं की स्त्रियां कभी ज्ञानी न हो पाई, आध्यात्म की पराकाष्ठा को, जन्म मरण की बाधा को न समझ पाई। पर वो ये देखना भूल गए के स्त्रियों के दामन में गृहस्थी का…
धरा पर जन्म लिया तो प्रभु से एक अनुपम उपहार पाया, अनेक क्षमताओं से परिपूर्ण यह नरतन पाया, धीरे धीरे दुनियाँ के झमेले में रमता गया, कुछ और, थोड़ा और पाने की लालसा में शरीर…
जीवन के अन्नन्त प्रवाह में, धूंदले से आसमान तले, हर दिन की दौड़ धूप में, ना जाने कितने सपनो को पनपते देखा है… हाँ, मैने परिवर्तन को एक भयंकर रूप लेते देखा है..! कभी करवट…
बंधन में बाँधु तुम्हे, या स्वयं ही मुक्त हो जाऊँ, उन्मुक्त सी होकर आकाश में उड़ूँ, और जीवन से मैं विरक्त हो जाऊँ, कुछ खोने और पाने की कशमकश से दूर, इस तन्हा सी भीड़…
ज़िंदगी की दहलीज़ पे, निशब्द सी खड़ी मैं, अपनी पहचान को तराशते हुए, कुछ अपनो के चेहरों पे, खोई मुस्कुराहट के मोती सजाए… चंद अरमानो की दास्तान, और कुछ उम्मीदों का काफिला पिरोए, हल्की सी…